Ahmad Rizvi

मस्जिद का मुंहादिम किया जाना

 सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में मस्जिद को सरकार के द्वारा मुनहदीम कर दिया गया ज़िला जज ने अगर अपील खारिज कर दी तब भी हाई कोर्ट में अपील का अवसर था आनन फानन में मस्जिद का तोड़ना मुस्लिमों के अवसर को ही समाप्त करना नहीं है बल्कि सविंधान और कानून की दुहाई देते रहिए अगर कानून का पालन कराने वाला ही बेइमान हो और कानून के पालन से इंकार कर दे या कानून का पालन न करे तो बताते रहिए सविंधान में यह लिखा है और संविधान अल्पसंख्यको को अधिकार देता है अपने religion के पालन करने को यह सब देश के बाहर के लोगो को बताने के लिए तो अच्छा है मगर देश के मुस्लिमों के लिए नहीं वो भी तब जब जयपुर में मस्जिद को मुंहादिम किया उज्जैन में मस्जिद को मुंहादिम किया गया उत्तराखंड बिहार बंगाल आदि जगहों से मस्जिदों को सरकार द्वारा मुंहादिम किया जा रहा हो 

नमाज़ पढे या क़ायम करे!

नमाज़ को अरबी भाषा मे सलात कहा गया है। फारसी भाषा मे नमाज़ कहा गया है नमाज़ पढे या क़ायम करे, नमाज़ मे ही सूरे पढ़ी जाती है सूरे मुज़्जमिल मे ज़िक्र है “व अकीमुस सलात व आतुज़ ज़कात व अकरिज़ुल्लाह करज़न हसना “ इसमे अकीमुस सलात “ कायम करो सलात को । अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हुक्म दिया है सलात (नमाज़) को क़ायम करो । क़ायम करना किसे कहते है और पढ़ना किसे कहते है क़ायम करना किसी ऐसे कार्य को क्रमबद्ध जारी रखना है । पढ़ना का अर्थ है कि आप किसी भी बिना मुताईयन (निर्धारित) किए जब चाहे पढे । इसमे वक्त की मियाद (LIMIT) नहीं है । अब एक बेहतरीन नज़ीर के ज़रिए क़ायम को समझा जा सकता है । इंसान या जानदार के दिल की धड़कन को समझे । अगर एक धड़कन के बाद धड़कना बंद हो जाए तो इंसान या जानदार की मौत हो जाएगी और लगातार धड़के तो ज़िन्दगी की निशानी है यह लगातार धड़कना क़ायम होना कहलाता है । क्या लगातार धड़कने मे दिल आराम भी करता है जी हाँ एक्सपर्ट (माहरीन) की राय है कि दिल की दो धड़कनों के बीच दिल आराम भी करता है । सलात (नमाज़) क़ायम करने का जो हुक्म दिया गया है उसे लगातार बनाए रखने के लिए है अर्थात क़ायम करने के लिए है । जैसे फ़जर की सलात (नमाज़) के बाद ज़ुहर की सलात (नमाज़) ज़ुहर के बाद असिर की सलात (नमाज़) असिर की सलात (नमाज़) के बाद मगरीब की सलात (नमाज़) मग़रीब की सलात (नमाज़) के बाद ईशा की सलात (नमाज़) और जो वाजिब (mandatory) नहीं है तहजजुद की सलात (नमाज़) इस तरह रात और दिन मे इसको क़ायम करने का हुक्म दिया गया है । अर्थात सलात (नमाज़) को क़ायम (maintain) रखना है । नमाज़ (सलात) पढ़ना नहीं है बल्कि क़ायम रखना है । पढ़ना सलात का जुज़ (भाग/part) है ,

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