Ahmad Rizvi

सहाबा का एहतराम!

बिरादर मुस्लिम सवाल उठाते हैं कि सहाबा का एहतराम शिया नहीं करते कभी सवाल पूछा कि सहाबा का एहतराम कितना उस वक़्त के लोगो ने किया निम्न नज़ीर देता हूं:- 1. हज़रत अली अलैहिस सलाम अहले बैअत नबी भी है जानशीन रसूल भी है मौला भी सहाबी ए रसूल भी है हज़रत अली को रस्सी से बांधने वाले मुनाफिकों पर खामोश रहते है। नहीं बताओगे कि सहाबा का एहतराम करना चाहिए। 2. हज़रत अबुज़र गफ़ारी का नाम तो सुना होगा उनको सहाबी ही शहर बदर कर रहे सहाबी ही पिटवा रहे हैं। क्यों अब खामोश हो अब नहीं बताओगे सहाबा का एहतराम क्यों नहीं किया। 3. हज़रत हुजर बिन अदी को तशदूद करके जान से मार दिया गया सहाबा के चहीतो तुम्हारी खामोशी तुम्हारी मक्कारी को इन्क़ेशाफ़ कर रही है। सहाबा की आड़ में अहले बैअत नबी, रसूल उल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम और उनकी आले पाक मुखालफत करना है वरना सहाबा की अज़मत की बात होती अहले बैअत से लड़ने वाले मुनाफिकों के नक़ाब को उतार फेंकते उनका देफा न करते।  

"नबीयुल उम्मी "

हज़रत मोहम्मद मुस्तफा  सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  की  हदीस है अना मदीनतुल इल्म  व अलीयुन बाबाह (दरवाज़ा) "मैं इल्म का शहर हूं और अली उसके  बाब (दरवाज़ा ) है।

हज़रत मोहम्मद मुस्तफा  सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  की  हदीस  " मै तब नबी था जब  हज़रत आदम का ख़मीर  गूँथा जा रहा था"

सुलह हुदैबिया के मौके पर जब अल्लाह के नबी  सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  और काफिरो के  बीच सुलह हो रही थी उस मौके पर काफिरो ने जिस लफ़्ज़ पर एतराज़ किया था वो था "रसूलउल्लाह"। काफिरो ने कहा कि हम आपको रसूलउल्लाह  नही मानते,अल्लाह के नबी सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  ने हज़रत अली अलैहिससलाम से रसूलउल्लाह हटाने के लिए कहा जिस अदब से आपने खुद हटाने से इंकार किया ,अल्लाह के नबी सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  ने उस सुलह मे "मोहम्मद रसूलउल्लाह सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म " की जगह मोहम्मद  इबने  अब्दुल्लाह  लिखा"

कुरान मजीद मे " इकरा" लफ़्ज़  आया और पूरा कुरान पाक  नबी करीम सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  की  ज़ाते अक़्दस पर  नाज़िल हुआ अगर नबी पढे नही थे तो अल्लाह रब्बुल इज्ज़त सुभानहु ताआला  इकरा   पढ़ने के लिए क्यों कहता?

एक बात और मै  इल्म  का शहर हूँ नबी  करीम सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म   "इल्म का शहर" कहना और उम्मत के कुछ अफराद  या गिरोह का  नाऊज़बिल्लाह मिन ज़ालिक अनपढ़ कहना" इस  उम्मत के कुछ अफराद  या गिरोह  ने अपनी  जाहिलियत का सबूत दे दिया  और  विरोधाभाषी  और विवादास्पद बनाया है।

 नबी  करीम सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  अंबियाओ और रसूलो  से अफ़जल है  और अगर किसी नबी ,पैगम्बर, रसूल ,अम्बिया मे अफ़जल (फ़ज़ीलत वाले  गुण) हुए तो नबी  अफ़जल कैसे हुए ?  इसका अर्थ ये है कि नबी पाक सललल्लाहो  अलैह  व  आले  वसल्ल्म  हर नबी  पर फ़ज़ीलत  रखते है।

हज़रत ईसा अलैहिस सलाम पैदा होते हुए कलाम करने लगे और माँ के गर्भ से ही नबी हो  वो माँ के गर्भ से नबी न  हो जबकि  आदम के ख़मीर के गूँथने  से क़ब्ल अल्लाह के नबी थे।

उम्म  के माने  माँ से है  नबीयुल उम्मी  का  मतलब माँ के गर्भ से ही नबी होना

 " अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन निन नबीउल उम्मी व अला आले वसल्लम तसलीमा"


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

मौला अली साबिक अम्बिया से अफज़ल है

इंजील मे इमाम हुसैन का ज़िक्र