Ahmad Rizvi

जवाबदेही/उत्तरदायी/accountability

                   जवाबदेही/उत्तरदायी/ accountability आज़ाद भारत और राजशाही मे अन्तर क्या है जब दोनों मे अधिकारीयों या नौकरशाह की मनमानी पर अंकुश ही न हो जब अदलिया सुनववाई करने से सीधा मना कर दे या यह कहे कि उसके पास इसके सुनने का समय ही नहीं है या राजा की मंशा के अनुसार काम करे और न्याय का गला घोंट दे तानाशाही राजशाही और लोकतंत्र मे अन्तर रह ही नहीं जाता जब जवाबदेही निर्धारित न हो फिर राजशाही और लोकतंत्र मे अन्तर सरकार चुनने का है और कोई अन्तर नहीं है । आज जब देखते है तो किसी आवेदन पत्र सदेश को लेने से इंकार कर दिया जाता है इसे आप छोड़ जाओ इस पर कोई प्राप्ति नहीं देंगे । डाकिया अपनी ड्यूटी से बचने के लिए अक्सर व्यक्ति मिला नहीं डाक वापस थाने मे आवेदन पत्र को पहले लेकर उसमे तोल मोल होता है तोल मोल होने के बाद प्राथीमिकी दर्ज की जाती है । आला अधिकारी से शिकायत के बाद भी दरोगा जी शिकायतकर्ता को धमकाते है और एफ आई आर दर्ज नहीं करते सरकारे क्राइम को कम करके बताती है कि उनका शासन बहुत बढ़िया है थाने मे लोगो...

नबी के साथी और मुखालिफ कौन है ?


  1. नबी के साथी और मुखालिफ कौन है ?
  2. कुरान हकीम हिकमत से भरा है नबी मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के साथ कौन है और नबी का मुखालिफ कौन है ? कुरान मजीद मे इस सम्बन्ध मे बहुत आसान तरीका दिया गया है जिससे नबी करीम  मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के दौर से लेकर कयामत तक के लोगों को समझा जा सकता है कुरान मजीद के सूरा फतह (48) की आयत संख्या 29 मे दिया गया है मोहम्मद (सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम) अल्लाह के रसूल है और जो लोग उनके साथ है काफिरों पर बड़े सख्त और आपस मे बड़े रहम दिल है तू उनको देखेगा (कि खुदा के सामने) झुके (रुकु) सरबसूजूद है खुदा के फ़ज़ल और उसकी खुशनुदी के ख्वास्तगार है कसरत सुजूद के असर से उनकी पेशानियों पर घटटे पड़े हुवे है यही औसाफ उनके तौरात मे भी है और यही हालात इंजील मे ज़िक्र किया गया है ! गोया वो एक ऐसी खेती है कि जिस ने अपनी मोटी सुई निकाली फिर उसी सुई को मज़बूत किया तो मोटी हुई फिर अपनी जड़ पर सीधी खड़ी हो गई और अपनी ताज़गी से किसानों को खुश करने लगी ताकि उनके ज़रिए काफिरों को जी जलाए जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे खुदा ने उनसे बख्सीश और अजरे अज़ीम का वादा किया है

जो नबी के साथी है उन मे खूबी इस तरह है :-

1.  मोहम्मद (सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम) अल्लाह के रसूल है और जो लोग उनके साथ है काफिरों पर बड़े सख्त और आपस मे बड़े रहम दिल है।

2.   उनको देखेगा (कि खुदा के सामने) झुके (रुकु) सरबसूजूद है खुदा के फ़ज़ल और उसकी खुशनुदी के ख्वास्तगार है।

3.  कसरत सुजूद के असर से उनकी पेशानियों पर घटटे पड़े हुवे है यही औसाफ उनके तौरात मे भी है और यही हालात इंजील मे ज़िक्र किया गया है !

4.   अल्लाह के नबी के साथियों के ज़रिए काफिरों को जी जलाए जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे खुदा ने उनसे बख्सीश और अजरे अज़ीम का वादा किया है।

अल्लाह के नबी सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के मुखालिफ़ो मे क्या खूबी है :-

1. मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के जो मुखालिफ है वो काफिरों पर बड़े बड़े रहम दिल है और जो नबी के साथ है उन पर बड़े सख्त है । इस तरह हम लोगों को देखना होगा कि जो नबी के साथी है उन पर कौन लोग सख्त है और काफिरों पर रहम दिल है इससे नबी मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के दौर से लेकर आजतक और आने वाले समय तक के लिए जाना जा सकता है ।

2. नबी के मुखालीफ़ों को देखेगा कि खुदा के खिलाफ खड़े है खुदा के गज़ब और क़हर  के ख्वास्तगार है।

3. कसरत नाफ़रमानी खुदा का  करने वालों ज़िक्र भी  तौरात मे भी है और यही हालात इंजील मे ज़िक्र किया गया है !

4. अल्लाह के नबी के मुखालिफ़ो के ज़रिए नबी के साथियों ज़ुल्म करना है शरीयत का विरोध करना है  जो लोग ईमान लाए उनके खिलाफ काम करना है उनको अज़ियत देना है  बुरे काम करते रहना  खुदा ने उनसे अज़ाब  और कठोर दंड  का वादा किया है।

इन लोगों के अलावा अल्लाह के नबी मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के मुखालिफ का ज़िक्र है जो खुले हुवे मुखालिफ या दुश्मन नहीं है जो मुसलमान होते हुवे भी नबी मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के मुखालिफ है जिसको अल्लाह सुभान व तआला तो जानता है बल्कि उसने सूरे मुनाफिकून मे बता भी दिया लेकिन अल्लाह सुभान व तआला ने जो नबी की हयात तययबा मे बताया था वो रहती दुनिया तक आज भी साबित है ।

सूरे मुनाफिकून ये मुनाफ़कीन आप के पास आते है तो कहते है कि हम गवाही देते है कि आप अल्लाह के रसूल है और अल्लाह भी जानता है आप उस के रसूल है लेकिन अल्लाह गवाही देता है कि ये मुनाफ़कीन अपने दावे मे झूठे है

अब सूरे फतह की आखरी आयत को देखे जिसमे मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम अल्लाह के रसूल है और उनके साथीयों का ज़िक्र है और सूरे मुनाफिकून मे भी मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के रसूल की गवाही का जिक्र है मगर यहाँ एक फ़र्क है वो फ़र्क यह है कि गवाही देने वाले झूठे है इसको अल्लाह बता रहा है कैसे समझे कि झूठी गवाही कौन दे रहा है और सच्ची गवाही कौन दे रहा है इसको समझना आसान है जो अल्लाह के नबी मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करे उनके फैसले के खिलाफ काम करे उनकी शरीयत के खिलाफ काम करे सूरे अहज़ाफ़ मे इतरत से मोअददत के हुक्म के बाद उन पर ज़ुल्म करने लगे । नबी मोहम्मद सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम जिसको मौला बनाये उनकी मुखालफत करना रसूलउल्लाह की गवाही के बाद उनकी मुखालफत करना है इस तरह कयामत तक के लोगों को देख सकते है कि नबी के साथ कौन है और नबी के खिलाफ कौन है ? बेहतरीन ज़ाब्ता है ।     

 

 
 

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