Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

सरकार की मंशा

<अखलाक हो तस्लीम हो या अन्य कोई हो जिनकी मॉब लिचिंग की गई हो सरकार का काम अपराधियों को सज़ा दिलाना है इस केस में सरकार बनाम अपराधी मुकदमा चलता है सरकार ने अखलाक के केस में उच्च न्यायालय में केस को वापसी लेने के लिए अपील की। इस अपील के बाद लोगों के मन में सरकार की मंशा को लेकर सवाल पैदा होने लगे। 1. क्या सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है? 2. क्या भारतीय जनता पार्टी की सिस्टर संस्थाएं ने गैंग के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया है? 3. क्या मॉब लिनचीग़ में मुसलमानों के क़त्ल में भारतीय जनता पार्टी की सिस्टर संस्थाएं ही टार्गेटिंग किलिंग कर रही 4. क्या भारतीय जनता पार्टी अपराधियों के संरक्षण में खुलकर सामने आ गई है। 5. क्या सरकार अपील करने के बाद खामोश रहेगी या सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ या नाजायज दबाव नहीं बनाएगी पहले प्रश्न का जवाब है कि सरकार अपराधियों के साथ खुलकर सामने आ गई है इससे पहले भी बिल्किश बानो के अपराधियों की हौसला अफज़ाई की गई जयंत सिन्हा ने अपराधियों के जमानत पर उनका माल्यार्पण किया उससे साबित है कि अपराधियों को संरक्षण भारतीय जनता पार्टी लगातार देती आ रही है। ज्यादातर मुस्लिम मॉब lynching और चर्चों पर हो रहे हमलों पर बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद आर एस एस के लोगो का हाथ सामने आ रहा है और सरकार उनको सज़ा दिलाने के बजाय उनको संरक्षण पुलिस और अन्य संस्थाओं द्वारा दिया जा रहा। मुस्लिमों को टार्गेट किलिंग की जा रही है और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराधियों को पनिश करने के स्थान पर राज्य की मंशा को देखते हुए अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। सरकार ने अखलाक के केस को वापस लेने के लिए अपील की अपील तो ख़ारिज हो गई लेकिन सरकार की मंशा अपराधियों को बचाने की सामने आने के बाद क्या सरकार खामोश रहेगी या सरकार अपराधियों को बचाने के लिए नया पैतरा अपनाएगी और नया पैतरा होगा सबूत को अदालत तक न पहुंचने देना गवाहों को गवाही न देने देना इस तरह भी अपराधियों की मदद की जा सकती है एक और सवाल उठता है वो यह है कि अपील खारिज होने के बाद अन्य मॉब lynching के अपराधियों को बचाने के नए पैतरे उपरोक्त में से कोई एक या सभी हो सकते है ऐसी आशंकाएं सभी मुस्लिम व्यक्त कर रहे हैं।/i>

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