Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

सुप्रीम लीडर के दुश्मन

< यह है अली शमीखानी जो सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई के सलाहकार है अपनी पुत्री की शादी इस तरह कर रहे है जैसे ईसाई करते है हिजाब का कानून लागू है ईरान से दुश्मनी निभाने वाले अमेरिका और इसराइल हमले की ताक में है ऐसे ईरान के अन्दर विद्रोह भड़काने के लिए अली शमीखानी ने जो चाल चली है उससे ईरान की जनता को भड़काना है और ईरान की जनता को सुप्रीम लीडर के खिलाफ खड़ा करना है इससे पता चलता है ईरान के भीतर कितने अंदर तक दुश्मन खुफिया एजेंसी के लोग काम कर रहे हैं यहां तक की सुप्रीम लीडर के अगल बगल बैठे लोग भी गद्दारी में कितने आगे हैं यह वक्त बतलाता है ईरान की मिलिट्री लीडरशिप में बहुत जनरलों का खात्मा गद्दारी को दर्शा रहा है >

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