Ahmad Rizvi

पत्रकारिता (सहाफ़त) की आड मे जासूसी

 अफ़्गनिस्तान मे रशीद दोस्तम को क़ातिल एक पत्रकार बनकर आया और क़त्ल कर दिया | ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई को स्पीच देने के दौरान किसी नामालूम सहाफ़ी ने बम नस्फ़ कर दिया था जिसमे आपका एक हाथ माज़ूल हो गया था |  ईरान मे यहूदी महिला जासूस ने सहाफ़ी बनकर किस तरह अपने ताल्लुक़ात को कायम किया कि तमाम फ़ौजी जनरलो के साथ साथ सुप्रीम लीडर से भी मुलाक़ात की और तमाम फ़ौजी जनरलो की सूचना और पते मोसाद और इस्राइल को पहुंचाती रही | लगातार इस्राइल सहाफ़ीयों का क़त्ल कर रहा है उसका मुख्य कारण यह है कि इस्राइल खुद अपने जासूसो को सहाफ़ी बनाकर भेजता है और दुनिया भर के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल वो जासूसी के लिए करता है और जहां इस्राएल नही पहुंच पाता है वहां  अपने दोस्त देशो के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल करता है  हाल ही मे अपने देश भारत मे भी सहाफ़ी और यूटयुबर ज्योति मेहरोत्रा को जासूसी के आरोप मे गिरफ़्तार किया गया | इस्राइल के जासूसो को अगर पकड़ना है तो इस्राइल समर्थक सहाफ़ीयों पर कडी नज़र रखनी होगी! 

सुप्रीम लीडर के दुश्मन

< यह है अली शमीखानी जो सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई के सलाहकार है अपनी पुत्री की शादी इस तरह कर रहे है जैसे ईसाई करते है हिजाब का कानून लागू है ईरान से दुश्मनी निभाने वाले अमेरिका और इसराइल हमले की ताक में है ऐसे ईरान के अन्दर विद्रोह भड़काने के लिए अली शमीखानी ने जो चाल चली है उससे ईरान की जनता को भड़काना है और ईरान की जनता को सुप्रीम लीडर के खिलाफ खड़ा करना है इससे पता चलता है ईरान के भीतर कितने अंदर तक दुश्मन खुफिया एजेंसी के लोग काम कर रहे हैं यहां तक की सुप्रीम लीडर के अगल बगल बैठे लोग भी गद्दारी में कितने आगे हैं यह वक्त बतलाता है ईरान की मिलिट्री लीडरशिप में बहुत जनरलों का खात्मा गद्दारी को दर्शा रहा है >

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