Ahmad Rizvi

उलूल अम्र

उलूल अम्र सूरे निसा आयत नम्बर 59 “इमानवालों अल्लाह की एताअत करो रसूल और साहिबाने अम्र की एताअत करो जो तुम ही मे से है फिर अगर आपस मे किसी बात मे इखतेलाफ़ हो जाए तो उसे अल्लाह और रसूल की तरफ पलटा दो अगर तुम अल्लाह और रोज़े आखरत पर ईमान रखने वाले हो – यही तुम्हारे हक़ मे खैर और अंजाम के एतबार से बेहतरीन बात है” 1. इमानवालों से मतालबा है कि एताअत करे अल्लाह सुभान व तआला और रसूल उल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की और साहिबाने अम्र की । 2. अगर आपस मे किसी बात पर इखतेलाफ़ हो जाए तो हमे इखतेलाफ़ को दूर करने के लिए अल्लाह और रसूल की तरफ पलटना है यहाँ इखतेलाफ़ अगर उलूल अम्र मे है तो हमे अल्लाह और उसके रसूल की ओर देखना है हिदायत हमे अल्लाह और रसूल सल्लल्लाहों अलैह व आले वसल्लम से लेना है । अल्लाह सुभान व तआला व रसूलउल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत मे कोई इखतेलाफ़ नहीं है । मगर उलेमा के द्वारा उलूल अम्र को समझने मे विरोधाभाष रहा है । सबसे पहले हम लोग अम्र को समझे अम्र क्या है जब अम्र समझ मे आ जाएगा तो साहबे अम्र या उलूल अम्र भी समझ पाएंगे । यहूदियों ने अल्लाह के रसूल से सवाल किया कि रूह क्या है ? सूरे इस्राइल (17:85) और पैगंबर यह आपसे रूह के बारे मे दरयाफ्त करते है तो कह दीजिए कि यह मेरे रब का अम्र है और तुम्हें बहुत थोड़ा सा इल्म दिया गया है। यहाँ पर अल्लाह का अम्र रूह है और उलूल अम्र या साहबे अम्र वो है जिसका हुक्म रूह पर भी है । अल्लाह सुभान व तआला की एताअत के साथ रसूल उल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत के साथ उलूल अम्र की एताअत का हुक्म दिया गया है। जहां बिरादरने अहले सुन्नत के उलेमा ने उलूल अम्र से हुकूमत करने वाले हाकिम को समझा । वहीं अहले तशीअ के उलेमा ने उलूल अम्र 1. हज़रत इमाम अली 2. हज़रत इमाम हसन 3. हज़रत इमाम हुसैन 4. हज़रत इमाम अली बिन हुसैन 5. हज़रत इमाम मोहम्मद बाकर 6. हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ 7. हज़रत इमाम मूसा काज़िम 8. हज़रत इमाम अली रज़ा 9. हज़रत इमाम मोहम्मद तकी 10. हज़रत अली नक़ी 11. हज़रत इमाम हसन असकरी 12. हज़रत इमाम मेहंदी यह सभी वही है जिनसे कुरान मजीद मे मोअददत का हुक्म दिया । उलूल अम्र और कौन हो सकता है जिसको हबीबउल्लाह सल्लल्लाहों अलैह व आले वसल्लम अपने जैसा मौला मानने के लिए गदीर मे बैअत ली हो । अहले बैअत के लिए अल्लाह के रसूल का इर्शाद है यह मेरे खास है मेरे हिमायत करने वाले मददगार है जिनका गोश्त मेरा गोश्त है जिनका खून मेरा खून है । हुसैन मुझसे है और मै हुसैन से हूँ । जो इनका दुश्मन वो मेरा दुश्मन जिन्होंने इनको अजीयत दी उन्होंने मुझको अज़ीयत दी जिसने उनको गमगीन किया उसने मुझको गमगीन किया । अब इसके बाद हम उलूल अम्र दुश्मने आले मोहम्मद मे तलाश करे तो फर्जी उलूल अम्र मिल जाएंगे । अगर किसी बात मे इखतेलाफ़ हो तो अल्लाह और उसके रसूल की तरफ पलटे तो यह निश्चित है कि कोई आले मोहम्मद का दुश्मन और कोई दुनियादार हाकिम उलूल अम्र नहीं हो सकता और न अल्लाह ऐसे गुमराह हाकिम की एताअत का हुक्म दे सकता है। उलूल अम्र 1. उलूल अम्र वो है जो हज़रत दाऊद के हाथों मे लोहा जैसे मोम हो जाता था उसी तरह उलूल अम्र ने लोहा मोम कर दिखाया । 2. उलूल अम्र ने सूरज को डूबने के बाद पलटा दिया । 3. उलूल अम्र वो है जिसने मुर्दे को जिंदा कर दिया जैसे हज़रत ईसा ने जिंदा किया । 4. उलूल अम्र वो है जब ज़िंदा मुर्दा बनाकर लाया गया तो मुर्दा हो गया । 5. उलूल अम्र वो है जिसने शाम को इराक और इराक को शाम बनाने को कहा और बन गया । 6. उलूल अम्र वो है जिसने सूली पर कुरान मजीद की तिलावत की । 7. उलूल अम्र वो है जिसने अपने हाथ की धोवन को हीरे मोती बना दिया । 8. उलूल अम्र वो है जिसने हर तरह के विज्ञान का इल्म दिया । 9. उलूल अम्र वो है जिसने चित्र मे बने शेर को हुक्म दिया कि देखता क्या है और वो वास्तविक शेर बन कर जादूगर को खा गया । 10. उलूल अम्र वो है जब दुनिया मे हज़रत ईसा दोबारा दुनिया मे तशरीफ़ लाएंगे और इमाम मेहंदी उन्हे इमामत नमाज़ के लिए कहेंगे और आप इमाम मेहंदी को इमामत के लिए कहेंगे यह आपका हक़ है । अब जो उलूल अम्र इनको त्याग कर किसी और को उलूल अम्र बनाया है तो कभी किसी ज़ालिम को उलूल अम्र समझा कभी किसी हाकिम को । लाल मस्जिद पर हमले के बाद जब मोलवी ने विरोध किया तो परवेज़ मुशर्रफ ने जो जवाब दिया कि हाकिम की एताअत बजा लाना तुम्हारा फर्ज है और यह तर्जुमा आप लोगों का है । अब अगर उलेमा ने एक गलती की है तो वो कहाँ तक जाती है जैसे अंग्रेज हुकूमत करे तो वो उलूल अम्र काफिर मुशरिक हुकूमत करे तो वो उलूल अम्र । “हक़ को नकारोगे तो बातिल को स्वीकारोगे “

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