Ahmad Rizvi

मौलूद –ए- काबा

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                    अल्लाह रब्बूल इज्जत ने साबिक अम्बिया और रसूल पर जो वाकयात या घटनाए हुई है उसके आने वाले समय मे उसका पैगाम देना है इबरत करना है नसीहत करना हिदायत देना है फ़ज़ीलत बताना है । जब हज़रत ईसा की पैदाइश का समय आया आपकी वालिदा जनाब बीबी मरीयम बैतुल मुक़द्दस के अन्दर रहती थी उस वक़्त अल्लाह सुभान व तआला ने बीबी मरियम को हुक्म दिया कि बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दो यह इबादत का घर है जच्चा खाना नहीं है । आप बीबी मरियम ने बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दिया । यहाँ पर सवाल उठता है कि 123998 अंबिया से अफजल हज़रत ईसा और उनकी माता बीबी मरियम दोनों पाक है दोनों फ़ज़ीलत रखते है हज़रत ईसा रसूल भी है । अल्लाह जुलजलाल वल इकराम का हर कारनामा हिकमत से भरा होता है । मौला अली की पैदाइश खाना – ए - काबा के अन्दर हुई थी आपकी वालिदा मुक़द्दस जनाबे फातिमा बिन्ते असद जब खाना - ए - काबा मे दाखिल हुई तो द...

जन्नत मे जवानों के सरदार

हज़रत हसनैन सलामुलाह अलैह के सम्बन्ध मे एक मशहूर और मारूफ़ हदीस है कि " हसन और हुसैन जवानाने जन्नत के सरदार है " इमाम हसन और इमाम हुसैन जन्नत मे जवानों के सरदार है । क्योंकि जन्नत मे कोई बूढ़ा नहीं जाएगा सब बूढ़े भी जवान होंगे । अब इस पर कई सवाल उठते है 1. दुनिया मे जो लोग उनको अपना सरदार नहीं मानते है क्या जन्नत मे उनके सरदार होंगे ? 2. जो लोग उनसे जंग लड़ चुके है या जंग लड़ रहे है उनका क्या हाल होगा । 3. जो लोग उनसे सुलह करते है क्या उनके सरदार होंगे ? सवाल थोड़ा पेचीदा है सवाल का जवाब बिना मुत्तासीर /prejudice/पूर्वाग्रह के देना है । दो तरह के लोग है वह लोग जो हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम को मानते ही नहीं ,उनका इससे कोई तालुक नहीं । वो लोग जो हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम को रसूल मानते है उनका इस हदीस से ताल्लुक है । आईये इस हदीस की रोशनी मे कुछ पिछले वाकयात को देखे जो रसूल ए खुदा से है :- जैसे सुलह हुदैबिया मे कुफ़फार के साथ अल्लाह के नबी हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने सुलह की तो सुलह के आधार पर कुफ़फार मोमिन नहीं हो गए , कुफ़फार कुफ़फार ही रहे उनकी स्थिति नहीं बदल गयी । दुनिया मे सुलह के आधार पर अगर कुफ़फार आखरत मे अल्लाह के नबी को रसूल मान भी ले तो उनका यह मानना किसी काम का नहीं । दूसरी बात यह है कि सुलह और जंग हमेशा मुखालिफ (विरोधी ) से की जाती है जो भी सुलह कर रहा है या जंग कर रहा है वह एक दूसरे के विरोधी है अनुयायी फॉलोवर्स एताअत करता है । जिसने दुनिया मे हज़रत हसनैन सलामउल्लाह अलैह को सरदार माना उनकी एताअत की उसके आखरत मे भी सरदार होंगे । और जिसने उन हजरात के साथ सुलह की या जंग की वो उनका मुखालिफ है और उसने उनको सरदार नहीं माना और उनकी एताअत नहीं की उसके आखरत मे भी सरदार नहीं होंगे ।

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