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Showing posts from February, 2023

Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

जन्नत मे जवानों के सरदार

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हज़रत हसनैन सलामुलाह अलैह के सम्बन्ध मे एक मशहूर और मारूफ़ हदीस है कि " हसन और हुसैन जवानाने जन्नत के सरदार है " इमाम हसन और इमाम हुसैन जन्नत मे जवानों के सरदार है । क्योंकि जन्नत मे कोई बूढ़ा नहीं जाएगा सब बूढ़े भी जवान होंगे । अब इस पर कई सवाल उठते है 1. दुनिया मे जो लोग उनको अपना सरदार नहीं मानते है क्या जन्नत मे उनके सरदार होंगे ? 2. जो लोग उनसे जंग लड़ चुके है या जंग लड़ रहे है उनका क्या हाल होगा । 3. जो लोग उनसे सुलह करते है क्या उनके सरदार होंगे ? सवाल थोड़ा पेचीदा है सवाल का जवाब बिना मुत्तासीर /prejudice/पूर्वाग्रह के देना है । दो तरह के लोग है वह लोग जो हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम को मानते ही नहीं ,उनका इससे कोई तालुक नहीं । वो लोग जो हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम को रसूल मानते है उनका इस हदीस से ताल्लुक है । आईये इस हदीस की रोशनी मे कुछ पिछले वाकयात को देखे जो रसूल ए खुदा से है :- जैसे सुलह हुदैबिया मे कुफ़फार के साथ अल्लाह के नबी हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने सुलह की तो सुलह के आधार पर कुफ़फार मोमिन न...