Ahmad Rizvi

मौलूद –ए- काबा

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                    अल्लाह रब्बूल इज्जत ने साबिक अम्बिया और रसूल पर जो वाकयात या घटनाए हुई है उसके आने वाले समय मे उसका पैगाम देना है इबरत करना है नसीहत करना हिदायत देना है फ़ज़ीलत बताना है । जब हज़रत ईसा की पैदाइश का समय आया आपकी वालिदा जनाब बीबी मरीयम बैतुल मुक़द्दस के अन्दर रहती थी उस वक़्त अल्लाह सुभान व तआला ने बीबी मरियम को हुक्म दिया कि बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दो यह इबादत का घर है जच्चा खाना नहीं है । आप बीबी मरियम ने बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दिया । यहाँ पर सवाल उठता है कि 123998 अंबिया से अफजल हज़रत ईसा और उनकी माता बीबी मरियम दोनों पाक है दोनों फ़ज़ीलत रखते है हज़रत ईसा रसूल भी है । अल्लाह जुलजलाल वल इकराम का हर कारनामा हिकमत से भरा होता है । मौला अली की पैदाइश खाना – ए - काबा के अन्दर हुई थी आपकी वालिदा मुक़द्दस जनाबे फातिमा बिन्ते असद जब खाना - ए - काबा मे दाखिल हुई तो द...

तकईया

अक्सर लोग बात करते है और कभी कभी यह भी कह देते है कि आप लोगो (शियों) के यहाँ तकईय भी होता है। यह जानकार लोग जैसे तकईय को अच्छी तरह से जानते हो । एक बात और जोड़ता चलूँ जैसे किसी कक्षा 8 के बच्चे को जो केमेस्ट्री पढ़ाई जाती है उसे अगर MSC की केमेस्ट्री पढ़ा दी जाए या तो पढ़ ही नहीं पायेगा और अगर पढ़ लिया तो समझना मुमकीन नहीं है । आइये तकईया के उदाहरण देखते है:- हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी पत्नी जनाबे सारा को अपनी बहन बताया यह एक मशहूर और दिलचस्प वाकया का ज़िक्र ओल्ड testament (तौरात) मे दिया गया है जिसमे बादशाह पत्नी को रख लेता और बहन को छोड़ दता परवरदिगार से आपस मे सभी भाई बहन है इस प्रकार हज़रत इब्राहीम ने इस हिकमत को बयान किया। इसमे हिकमत लिखा है ,अभी तकईया नहीं लिखा है। सुरे कहफ मे हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और हज़रत खिज्र अलैहिस्सलाम का वाकया का ज़िक्र किया गया है जिसमे बादशाह अच्छी नावों को पकड़ लेता था और खराब और नुक्स वाली नावों को छोड़ देता था हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने उस नाव मे नुक्स डाल दिया और उसको ज़ब्त होने से बचा लिया । इसमे हिकमत है। हज़रत अली अलहिस्सलाम किसी मक़ाम पर बैठे थे एक मज़लूम ने अपनी जान को बचाने के लिए मौला अमीरुल मोमीनीन से कहा , उस मज़लूम को ज़ालिम शख्स पीछा कर रहा था उस मज़लूम शख्स के जाने के बाद आप अमीरुल मोमीनीन जिस मुकाम पर बैठे थे उस मुकाम से उठकर दूसरी मुकाम पर जाकर बैठ गए। पीछा करने वाले व्यक्ति ने मौला अमीरुल मोमीनीन के पास आकर पूछा कि यहाँ से किसी को जाते हुए आप ने देखा है इस पर मौला ने जवाब दिया " जब से मै यहाँ पर बैठा हूँ उस समय से यहाँ से कोई नहीं गया" हिकमत भरी बात " जब से मै यहाँ पर बैठा हूँ।" महाभारत के युद्ध मे " अश्वाथामा" एक द्रोणाचार्याके पुत्र का नाम भी अश्वाथामा था और युद्ध मे लड़ने वाले एक हाथी का नाम भी अश्वाथामा था युद्ध मे गूंज उठी अश्वाथामा मारा गया द्रोणाचार्या के कनफुज़न के लिए उसी समय श्रीक्रष्ण ने शंखनाद कर दिया " अब अश्वाथामा मारा गया जिस पर द्रोणाचार्य ने अपने पुत्र का वध होना समझा । जबकि हाथी मारा गया था । एक और कहानी - एक व्यक्ति के गेहूं के ढेर मे दूसरे व्यक्ति ने अपने घर से गेहूं का एक दाना लाया और उसके आधा काट कर गेहूं के ढेर मे डाल दिया और गेहूं के ढेर वाले व्यक्ति से कहा कि इसमे आधा गेहूं मेरा है , बात मे तनाव होते होते पंचायत की गयी कि यह शख्स झूठ बोलता है कि उसका आधा गेहूं है । बात कसम पर पहुंची की यह आधा गेहूं की कसम खा ले तो मै उसको आधा गेहूं दे दूंगा उसने कसम खा ली और गेंहू के ढेर का आधा गेहूं ले गया। बहुत समय तक कसम का भी कोई प्रभाव उस पर न पड़ते देख एक दिन उसने इस सम्बन्ध मे उसी व्यक्ति से सवाल किया ,"यार " ये बताओ कि तुमने कसम भी झूठी खाई और मेरे गेहूं के ढेर से आधा गेहूं भी ले लिया फिर भी तुम्हें कुछ नहीं हुआ इस पर उसने अपनी उपरोक्त आधा गेहूं की बात बताई की सही मे मेरा आधा गेहूं (जो काट कर डाला था ) था। उपरोक्त नज़ीरों मे एक बात साफ है कि तकईय उसे कहा जाता है कि सामने वाला सच बोल रहा है लेकिन समझने वाला उसकी हिकमत और सलाहियत तक पहुँच नहीं सकता या उसका गलत माने निकाल लेता है । इसी को तकईया कहते है।

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